श्रीमद्भगवद्गीता का यज्ञ दर्शन – एक विवेचनात्मक अध्ययन
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Keywords

यज्ञ
कर्म
मुक्ति
आत्मशुद्धि
भगवद्गीता
श्रीमद्भगवद्गीता
Yagya
Karma
Mukti
Atmashuddhi
Bhagwatgita
Shrimadbhagwatgeeta

How to Cite

Jayswal, A. (2020). श्रीमद्भगवद्गीता का यज्ञ दर्शन – एक विवेचनात्मक अध्ययन: Yajna Philosophy of Srimad Bhagavad Gita – A Critical Study. Interdisciplinary Journal of Yagya Research, 3(1), 23-29. https://doi.org/10.36018/ijyr.v3i1.48

Abstract

यज्ञ वैदिक काल से एक प्रचलित अवधारणा रही है। यह अग्निहोत्र जैसी कर्मकांड परक क्रिया से लेकर आत्म परिष्कार की प्रखर आध्यात्मिक साधना को समाहित करता है। अन्य पुरातन विधाओं के समान यज्ञ की स्थूल मान्यता भी आज लोक प्रतिष्ठित है। यज्ञ के तीन अर्थ- दान, संगतिकरण व देवपूजन हैं। जिन के व्यापक अर्थ भगवद्गीता में मिलते हैं। भगवद्गीता में यज्ञ एक ‘जीवनदर्शन’ है। कर्म सम्पादन की शुभ्र व सप्राण प्रेरणा के रूप में यज्ञ की प्रतिष्ठा है; ‘यज्ञार्थ कर्म’ से कर्त्ता के कर्म ही आहुति रूप होकर परमार्थ के विराट कुण्ड में अर्पित किए जाते हैं। कामना, लोभ व निष्क्रियता से रहित जीवन क्रम यज्ञमय बनता है, जो संकीर्णता जन्य असंतोष से मुक्ति प्रदान करने वाला है। यज्ञीय जीवन सहकार व सह-अस्तित्व के मूल्यों से युक्त एक सतत प्रवहमान अवस्था है, जिसमें हर क्षण कर्म व्यक्त व विलीन होते हैं। गीतामें यज्ञ विविध प्रकार से है। इसे अर्पण द्वारा आरोहण की क्रिया माना गया है, जिसमें चेतना निम्न स्वभाव से उच्च व उच्चतर रूपों की ओर बढ़ती है। यह एक ओर साधनों का महत प्रयोजन के लिए संधान है, जो कर्मयोग का पर्याय बनता है, दूसरी ओर आत्म शुद्धि की सूक्ष्म व गुह्य प्रक्रिया।

Yagya has been a prevalent concept since Vedic times. It includes rituals like Agnihotra to intense spiritual practice of self-refinement. Like other ancient methods, the gross recognition of Yagya is also popular today. Yajna has three meanings - charity, association and worship of God. Whose broad meaning is found in the Bhagavad Gita. Yagya is a 'life philosophy' in Bhagavad Gita. Yajna has a reputation as a pure and life-giving inspiration for performing actions; With 'Yagyarth Karma', the actions of the doer are offered in the form of sacrifice in the vast pool of God. The order of life without desire, greed and passivity becomes sacrificial, which gives freedom from dissatisfaction caused by narrow-mindedness. Yagya life is a continuously flowing state with the values ​​of co-existence and co-existence, in which karmas are expressed and dissolved every moment. There are different types of yagya in Gita. It is considered as an act of ascension by offering, in which the consciousness moves from the lower nature to higher and higher forms. On the one hand, it is the integration of resources for a great purpose, which becomes synonymous with Karmayoga, on the other hand, the subtle and secret process of self-purification.

https://doi.org/10.36018/ijyr.v3i1.48
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Copyright (c) 2020 Anurag Jayswal

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