भारत में आध्यात्मिक पर्यटनके परिप्रेक्ष्य में यज्ञ की भूमिका, महत्व एवं संभावनाएं
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Keywords

आध्यात्मिक पर्यटन
यज्ञ
प्राचीन एवं आधुनिक भारत

How to Cite

कुमारआ., पाण्डेयम., & काबियाए. (2018). भारत में आध्यात्मिक पर्यटनके परिप्रेक्ष्य में यज्ञ की भूमिका, महत्व एवं संभावनाएं. Interdisciplinary Journal of Yagya Research, 1(2), 01 - 06. https://doi.org/10.36018/ijyr.v1i2.9

Abstract

भागदौड़ भरी जिन्दगी, आपाधापी भरा जीवन एवं व्यस्त दिनचर्या के चलते व्यक्ति अपने जीवन के कुछ पल शान्त एवं प्राकृतिक सौन्दर्ययुक्त स्थान पर बिताना चाहता है, किन्तु कहाँ और कैसे? इन्ही समस्याओं से मुक्ति एवं पर्यटकों को उनके अवकाश का सदुपयोग करवाने हेतु पर्यटन व्यवसाय आज दिन दूनी व रात चैगुनी प्रगति करता जा रहा है एवं आज यह विश्व का एक महत्वपूर्ण उद्योग बन गया है। पर्यटन का ही एक स्वरुप हैं आध्यात्मिक पर्यटन। आध्यात्मिक पर्यटन पर्यटकों को मनोरंजन यात्रा के साथ-साथ जीवन के प्रति सकारात्मक द्रष्टिकोण देता हैं। पर्यटक अपने स्थान से कहीं दूर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए यज्ञीय वातावरण को प्राथमिकता प्रदान करता है। आध्यात्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण घटक यज्ञ है। यज्ञ भारतीय संस्कृति का मूल है। इस शोध पत्र का लक्ष्य प्राचीन एवं आधुनिक भारत में आध्यात्मिक पर्यटन के उद्देश्यों को उद्घाटित करना एवं यह करने के लिए यज्ञ को एक उपकरण के रूप में चिन्हित किया गया है। प्राचीन एवं आधुनिक भारत में विभिन्न यज्ञों की परम्परा रही है। यज्ञ के माध्यम से पर्यटन का नवीन स्वरूप समाज के समक्ष प्रस्तुत होता है एवं पर्यटक स्वास्थय, नवीन प्रेरणा, उत्साह एवं आनन्द की प्राप्ति करता है।

https://doi.org/10.36018/ijyr.v1i2.9
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